राजस्थान सरकार ने राज्यवासियों के लिए एक बड़ी सौगात दी है। अब उपभोक्ताओं को हर महीने 150 यूनिट तक फ्री बिजली मिलेगी। यह नई योजना गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लॉन्च की गई है। हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं, जिसके कारण करीब 30 लाख उपभोक्ता, जिनके पास पक्की छत नहीं है, फिलहाल इस योजना से बाहर रहेंगे।
कौन कर सकता है रजिस्ट्रेशन
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं उपभोक्ताओं को मिलेगा, जो पहले से 100 यूनिट फ्री बिजली योजना में पंजीकृत हैं।
रजिस्ट्रेशन के लिए उपभोक्ता अपने संबंधित डिस्कॉम की वेबसाइट —
- JVVNL,
- JDVVNL,
- AVVNL,
या फिर Bijli Mitra पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
राज्य में फिलहाल करीब 1.36 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से 1.04 करोड़ उपभोक्ता पहले से 100 यूनिट योजना में रजिस्टर्ड हैं। यानी करीब 30 लाख उपभोक्ता, जिन्होंने पिछली योजना में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था, वे इस नई योजना से अभी वंचित रहेंगे।
छत की शर्त सबसे अहम
यह योजना पीएम सूर्य घर योजना (PM Surya Ghar Yojana) से जुड़ी हुई है। इस योजना के तहत उपभोक्ताओं के घर की छत पर 1.1 किलोवॉट के सोलर पैनल लगाए जाएंगे।
- जिनके घर पर पक्की छत है, वही इस योजना के पात्र हैं।
- फ्लैट, झुग्गी, या अस्थायी घरों में रहने वाले लोग अभी इस योजना में शामिल नहीं होंगे।
अधिकारियों के अनुसार, करीब 30 लाख उपभोक्ताओं के पास पक्की छत नहीं है, इसलिए उन्हें फिलहाल पिछली योजना यानी 100 यूनिट फ्री बिजली का लाभ मिलता रहेगा।
सोलर पैनल से कैसे मिलेगी फ्री बिजली
जो उपभोक्ता 1.1 किलोवॉट का सोलर पैनल लगवाएंगे, उन्हें मिलेगा:
- केंद्र सरकार से ₹33,000 की सब्सिडी
- राज्य सरकार से ₹17,000 की सहायता
यानि कुल ₹50,000 की मदद — जिससे पैनल लगवाने का खर्च लगभग मुफ्त हो जाएगा।
अगर कोई उपभोक्ता इससे बड़ा पैनल (3 किलोवॉट तक) लगवाता है, तो केंद्र सरकार की सब्सिडी बढ़कर ₹78,000 हो जाएगी, लेकिन राज्य की सहायता ₹17,000 पर ही सीमित रहेगी।
इन सोलर पैनलों से हर महीने लगभग 150 यूनिट बिजली उत्पन्न होगी, जो बिल से समायोजित हो जाएगी। यानी उपभोक्ता को हर महीने 150 यूनिट बिजली मुफ्त मिलेगी।
पिछली 100 यूनिट योजना रहेगी जारी
जिनके पास छत नहीं है, उनके लिए पहले की तरह 100 यूनिट फ्री बिजली योजना जारी रहेगी।
मंत्री नागर ने कहा कि नई योजना वैकल्पिक (optional) है। अतिरिक्त 50 यूनिट का फायदा केवल उन्हीं को मिलेगा जो सोलर पैनल लगवाएंगे।
सरकार आगे चलकर बिना छत वाले उपभोक्ताओं के लिए भी नई व्यवस्था पर काम कर रही है, ताकि भविष्य में उन्हें भी इसका लाभ दिया जा सके।
सरकार का आर्थिक नजरिया
वर्तमान में राज्य सरकार 1.04 करोड़ उपभोक्ताओं को 100 यूनिट फ्री बिजली देने पर हर साल ₹6,000 से ₹7,000 करोड़ खर्च कर रही है।
नई योजना के तहत जब उपभोक्ता खुद सोलर बिजली उत्पन्न करेंगे, तो सरकार का वित्तीय बोझ घटेगा और योजना कुछ सालों में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो जाएगी।
मंत्री नागर के अनुसार, “पुरानी योजना बिना वित्तीय योजना के शुरू की गई थी, जिससे राज्य पर भारी दबाव पड़ा। नई सोलर आधारित योजना से लाभ भी बढ़ेगा और वित्तीय स्थिरता भी बनी रहेगी।”
अतिरिक्त उत्पादन का लाभ
यदि कोई उपभोक्ता 150 यूनिट से ज्यादा बिजली उत्पन्न करता है, तो उसका फायदा भी मिलेगा।
उदाहरण के लिए — अगर किसी घर ने 200 यूनिट बिजली पैदा की लेकिन 140 यूनिट ही उपयोग की, तो 60 यूनिट अतिरिक्त बिजली अगले बिल में समायोजित की जाएगी या साल के अंत में आर्थिक रूप से भुगतान किया जाएगा।
नए उपभोक्ताओं के लिए सहायता
जो उपभोक्ता पिछली 100 यूनिट योजना में शामिल नहीं थे, उन्हें फिलहाल केवल केंद्र सरकार की सब्सिडी मिलेगी।
राज्य सरकार की ₹17,000 की सहायता फिलहाल केवल पुराने पंजीकृत उपभोक्ताओं के लिए है।
इससे सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि योजना का पहला लाभ उन्हीं को मिले जो पहले से सरकारी योजनाओं का हिस्सा हैं।
रजिस्ट्रेशन और क्रियान्वयन
रजिस्ट्रेशन हाल ही में शुरू हुए हैं और पहले ही दिन 8,000 से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया।
सरकार जल्द ही पात्र उपभोक्ताओं के घरों पर सोलर पैनल लगवाने का काम शुरू करेगी, जिसके बाद उन्हें 150 यूनिट फ्री बिजली का लाभ मिलेगा।
भविष्य की योजना
सरकार भविष्य में ऐसे उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक सोलर समाधान जैसे —
- आंगन आधारित पैनल
- सामुदायिक (community) सोलर प्लांट —
लाने की योजना बना रही है।
लक्ष्य यह है कि राज्य के सभी उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे इस योजना में जोड़ा जाए, और साथ ही पर्यावरण व अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिले।
निष्कर्ष
राजस्थान की नई 150 यूनिट सोलर फ्री बिजली योजना न सिर्फ लोगों को राहत देगी, बल्कि यह पर्यावरणीय स्थिरता और आर्थिक बचत की दिशा में एक बड़ा कदम है।
यह योजना सस्टेनेबल एनर्जी और जनहित — दोनों को जोड़ती है, जिससे आने वाले वर्षों में राजस्थान ग्रीन एनर्जी में अग्रणी राज्य बन सकता है।
